Maahishmati Anthem

माहेष्मती साम्राज्यं
सर्वोत्तम अजेयम
दसो दिशाएं आभियान
सब इसको करते प्रणाम

खुशहाली वैभवशाली समृद्धियां निराली
धन्य-धान्य है यहां प्रजा
शांति का ये स्वर्ग था

माहेष्मती की पताका
सदा यूं ही गगन चूमे
अश्व दो और सूर्यदेव मिलके
सर्वसिंहासन विराजे

हैस्सा…रूद्रस्सा… हैसारा-भद्रा समुद्रस्सा…

भड़ी…भड़ी…भड़ी… रा भड़ी…
साहो रे बाहुबली
जय हारथनी के पत्तली…पत्तली

भुव-ना-लन्नी, जय कोट्टली
गगनाले, छत्रं पट्टलि

हैस्सा…रूद्रस्सा… हैसारा-भद्रा समुद्रस्सा…
हैस्सा…रूद्रस्सा… हैसारा-भद्रा समुद्रस्सा…
हैस्सा…रूद्रस्सा… हैसारा-भद्रा समुद्रस्सा…
हैस्सा…रूद्रस्सा… हैसारा-भद्रा समुद्रस्सा…

आ…जननी दीक्षा अचलं,
ई…कोडूकी कवचं.
इप्पुडा… अम्मकि…अम्मावै-नंदुका
पुलकरिन छिनगिदा ई..क्षण

अड़ावुलु गुट्टाल-मिट्टाल गमिंचू
पीडिकिटा-पिडगुल पट्टी मींचु
अरीकुला वर्गाल-दुर्गाल जयिंचु
अवानिकी स्वर्गाले दिनचू

अंत महा बलुदेना, अम्मा वोदि पसीवाड़े
शिवुदैना, भवुदैना, अम्माकु-साती कादं ताड़े

हैस्सा…रूद्रस्सा… हैसारा-भद्रा समुद्रस्सा…
हैस्सा…रूद्रस्सा… हैसारा-भद्रा समुद्रस्सा…
हैस्सा…रूद्रस्सा…हैस्सा…रूद्रस्सा…
हैसारा-भद्रा समुद्रस्सा…हैसारा-भद्रा समुद्रस्सा…

हैस्सा…रूद्रस्सा… हैसारा-भद्रा समुद्रस्सा…
हैस्सा…रूद्रस्सा… हैसारा-भद्रा समुद्रस्सा…
हैस्सा…रूद्रस्सा… हैसारा-भद्रा समुद्रस्सा…
हैस्सा…रूद्रस्सा… हैसारा-भद्रा समुद्रस्सा…

हैस्सा…रूद्रस्सा… हैसारा-भद्रा समुद्रस्सा…

भड़ी…भड़ी…भड़ी… रा भड़ी…
साहो रे बाहुभड़ी
जय हारथनी के पत्तली…पत्तली (x2)
भुव-ना-लन्नी, जय कोट्टली
गगनाले, छत्रं पट्टलि…

किदरे जावां ???

मै खड़ी हूँ, रस्ते पे
बस्ते लदे सवालों के
कुछ बेरंग ख़यालों के

किदरे जावां, लम्बा छांवा
तक़दी रवां, न देन सलावां

मुड़ अब, घर को तू जा ।

न कोई साथी मेरा
न कोई रहबर है
अकेला शहर मुझपे हस्ता है
ख्वाबों का चेहरा खस्ता है

मेरे आस्से, मेरे पास्से
फ़र्ज़ी से, बेवजाह से
तस्सलियाँ, दिलास्से
वहमों में मुझ को फास्से

जग जोड़ियां, मैंने तोड़ियाँ
सची प्रीत मिले थोडियां
छोडियां, मुल्ल कोडियां
सब सच-झूठ मैं मोड़ेया

किदरे जावां, लम्बा छांवा
तक़दी रवां, न देन सलावां

मुड़ अब, घर को तू जा…

-आदित्य शर्मा
‘हरामखोर’

Music & Singer: Jasleen Royal
Music Producer: Raghav Mehta, Sameer Uddin
Pre Mix: Ikramuddin Lochoor
Mix & Master: Abhishek Sortey
Recorded by: Carl Nazareth
Executive Producer: Piyush Abhay Singh

Banner: Sikhya Entertainment Pvt Ltd
Produced by: Guneet Monga, Anurag Kashyap, Feroze Alameer, Achin Jain
Written & Directed by: Shlok Sharma

Kidre Jaawan

Farewell #NationalPoetryMonth’17 🙂

 

न इश्क़ किया, न काम किया…

वो काम भला क्या काम हुआ
जिस काम का बोझा सर पे हो
वो इश्क़ भला क्या इश्क़ हुआ
जिस इश्क़ का चर्चा घर पे हो…

वो काम भला क्या काम हुआ
जो मटर सरीखा हल्का हो
वो इश्क़ भला क्या इश्क़ हुआ
जिसमें ना दूर तहलका हो…

वो काम भला क्या काम हुआ
जिसमें ना जान रगड़ती हो
वो इश्क़ भला क्या इश्क़ हुआ
जिसमें ना बात बिगड़ती हो…

वो काम भला क्या काम हुआ
जिसमें साला दिल रो जाए
वो इश्क़ भला क्या इश्क़ हुआ
जो आसानी से हो जाए…

वो काम भला क्या काम हुआ
जो मज़ा नहीं दे व्हिस्की का
वो इश्क़ भला क्या इश्क़ हुआ
जिसमें ना मौक़ा सिसकी का…

वो काम भला क्या काम हुआ
जिसकी ना शक्ल इबादत हो
वो इश्क़ भला क्या इश्क़ हुआ
जिसकी दरकार इजाज़त हो…

वो काम भला क्या काम हुआ
जो कहे ‘घूम और ठग ले बे’
वो इश्क़ भला क्या इश्क़ हुआ
जो कहे ‘चूम और भग ले बे’…

वो काम भला क्या काम हुआ
कि मज़दूरी का धोखा हो
वो इश्क़ भला क्या इश्क़ हुआ
जो मजबूरी का मौक़ा हो…

वो काम भला क्या काम हुआ
जिसमें ना ठसक सिकंदर की
वो इश्क़ भला क्या इश्क़ हुआ
जिसमें ना ठरक हो अंदर की…

वो काम भला क्या काम हुआ
जो कड़वी घूंट सरीखा हो
वो इश्क़ भला क्या इश्क़ हुआ
जिसमें सब कुछ ही मीठा हो…

वो काम भला क्या काम हुआ
जो लब की मुस्कां खोता हो
वो इश्क़ भला क्या इश्क़ हुआ
जो सबकी सुन के होता हो…

वो काम भला क्या काम हुआ
जो ‘वातानुकूलित’ हो बस
वो इश्क़ भला क्या इश्क़ हुआ
जो ‘हांफ के कर दे चित’ बस…

वो काम भला क्या काम हुआ
जिसमें ना ढेर पसीना हो
वो इश्क़ भला क्या इश्क़ हुआ
जो ना भीगा ना झीना हो…

वो काम भला क्या काम हुआ
जिसमें ना लहू महकता हो
वो इश्क़ भला क्या इश्क़ हुआ
जो इक चुम्बन में थकता हो…

वो काम भला क्या काम हुआ
जिसमें अमरीका बाप बने
वो इश्क़ भला क्या इश्क़ हुआ
जो वियतनाम का शाप बने…

वो काम भला क्या काम हुआ
जो बिन लादेन को भा जाए
वो इश्क़ भला क्या इश्क़ हुआ
जो चबा…’मुशर्रफ’ खा जाए…

वो काम भला क्या काम हुआ
जिसमें संसद की रंगरलियां
वो इश्क़ भला क्या इश्क़ हुआ
जो रंगे गोधरा की गलियां…

वो काम भला क्या काम हुआ
जिसका सामा खुद बुश होले
वो इश्क़ भला क्या इश्क़ हुआ
जो एटम बम से खुश होले

वो काम भला क्या काम हुआ
जो दुबई फ़ोन पे हो जाये
वो इश्क़ भला क्या इश्क़ हुआ
जो मुंबई आके खो जाये

वो काम भला क्या काम हुआ
जो gym के बिना अधूरा हो
वो इश्क़ भला क्या इश्क़ हुआ
जो हीरो बनके पूरा हो

वो काम भला क्या काम हुआ
के सुस्त ज़िन्दगी हरी लगे
वो इश्क़ भला क्या इश्क़ हुआ
के लेडी मैकबेथ पारी लगे

वो काम भला क्या काम हुआ
जिसमे चीखों की आशा हो
वो इश्क़ भला क्या इश्क़ हुआ
जो मज़हब , रंग और भाषा हो

वो काम भला क्या काम हुआ
जो न अंदर की ख्वाहिश हो
वो इश्क़ भला क्या इश्क़ हुआ
जो पब्लिक की फरमाइश हो

वो काम भला क्या काम हुआ
जो कंप्यूटर पे खटखट हो
वो इश्क़ भला क्या इश्क़ हुआ
जिसमे न चिठ्ठी, न खत हो

वो काम भला क्या काम हुआ
जिसमे सरकार हुज़ूरी हो
वो इश्क़ भला क्या इश्क़ हुआ
जिसमे ललकार जरूरी हो

वो काम भला क्या काम हुआ
जो नहीं अकेले दम पे हो
वो इश्क़ भला क्या इश्क़ हुआ
जो ख़त्म एक चुम्बन पे हो

वो काम भला क्या काम हुआ
के हाय जकड गयी ऊँगली बस
वो इश्क़ भला क्या इश्क़ हुआ
के हाय पकड़ गई ऊँगली बस

वो काम भला क्या काम हुआ
के मनो उबासी मल्दी हो
वो इश्क़ भला क्या इश्क़ हुआ
जिसमे जल्दी ही जल्दी हो

वो काम भला क्या काम हुआ
जो न साला आनंद से हो
वो इश्क़ भला क्या इश्क़ हुआ
जो नहीं विवेकानंद से हो

वो काम भला क्या काम हुआ
जो चंद्रशेख आज़ाद न हो
वो इश्क़ भला क्या इश्क़ हुआ
जो भगत सिंह की याद न हो

वो काम भला क्या काम हुआ
जो पाक जुबां फरमान न हो
वो इश्क़ भला क्या इश्क़ हुआ
जो गांधी का अरमान न हो

वो काम भला क्या काम हुआ
के खाद में नफरत बो दूँ मैं
वो इश्क़ भला क्या इश्क़ हुआ
के हसरत बोले रो दूँ मैं

वो काम भला क्या काम हुआ
के खट तसल्ली हो जाये
वो इश्क़ भला क्या इश्क़ हुआ
के दिल न टल्ली हो जाये

वो काम भला क्या काम हुआ,
किस्मत यार पटक मारे
वो इश्क़ भला क्या इश्क़ हुआ
के दिल न मारे चटखारे

वो काम भला क्या काम हुआ
के कहीं कोई भी तर्क नही
वो इश्क़ भला क्या इश्क़ हुआ
के कढ़ी-खीर में फर्क नही

वो काम भला क्या काम हुआ
चंगेज़ खान को छोड़ दे हम
वो इश्क़ भला क्या इश्क़ हुआ
इक और बाबरी तोड़ दे हम

वो काम भला क्या काम हुआ
के एक्टिंग थोड़ी झूल के हो
वो इश्क़ भला क्या इश्क़ हुआ
जो मर्लीन ब्रेंडो भूल के हो

वो काम भला क्या काम हुआ
performance अपने बाप का घर
वो इश्क़ भला क्या इश्क़ हुआ
के मॉडल बोले ‘मैं एक्टर’

वो काम भला क्या काम हुआ
के टट्टी में भी FAX मिले
वो इश्क़ भला क्या इश्क़ हुआ
के भट्टी में भी सेक्स मिले

वो काम भला क्या काम हुआ
हर एक bob(robert)-de-niro हो
वो इश्क़ भला क्या इश्क़ हुआ
के निपट चूतिया हीरो हो


पियूष मिश्रा
on
“वो लोग बहुत ख़ुशक़िस्मत थे
जो इश्क़ को काम समझते थे
या काम से आशिक़ी करते थे

हम जीते जी मसरूफ़ रहे
कुछ इश्क़ किया कुछ काम किया

काम इश्क़ के आड़े आता रहा
और इश्क़ से काम उलझता रहा
फिर आख़िर तंग आकर हम ने
दोनों को अधूरा छोड़ दिया
– फ़ैज़ अहमद फ़ैज़ (1911-1984), पाकिस्तान”

during a Concert at FTII, Deccan Gymkhana, Pune, Maharashtra.
Jun 30, 2015

कृष्ण की चेतावनी…

दो न्याय अगर तो आधा दो,
और उसमें भी यदि बाधा हो,
तो दे दो केवल पाँच ग्राम,
रक्खो अपनी धरती तमाम।

हम वहीं खुशी से खायेंगे,
परिजन पर असि न उठायेंगे!
दुर्योधन वह भी दे न सका,
आशिष समाज की ले न सका,
उलटे, हरि को बाँधने चला,
जो था असाध्य, साधने चला।

हरि ने भीषण हुंकार किया,
अपना स्वरूप-विस्तार किया,
डगमग-डगमग दिग्गज डोले,
भगवान् कुपित होकर बोले-
‘जंजीर बढ़ाकर साध मुझे,
हाँ, हाँ दुर्योधन! बाँध मुझे।
यह देख, गगन मुझमें लय है,
यह देख, पवन मुझमें लय है,
मुझमें विलीन झंकार सकल,
मुझमें लय है संसार सकल।
सब जन्म मुझी से पाते हैं,
फिर लौट मुझी में आते हैं।

यह देख जगत का आदि-अन्त,
यह देख, महाभारत का रण,
मृतकों से पटी हुई भू है,
पहचान, कहाँ इसमें तू है?


रामधारी सिंह “दिनकर”
कृष्ण की चेतावनी, पाठ: ३- रश्मिरथी (1952)
लोक भारती प्रकाशन, अल्हाबाद

आरम्भ है प्रचण्ड…

आरम्भ है प्रचण्ड, बोले मस्तकों के झुंड, आज ज़ंग की घड़ी की तुम गुहार दो
आन बान शान या कि जान का हो दान आज इक धनुष के बाण पे उतार दो
आरम्भ है प्रचण्ड…

मन करे सो प्राण दे, जो मन करे सो प्राण ले, वही तो एक सर्वशक्तिमान है
कृष्ण की पुकार है, ये भागवत का सार है कि युद्ध ही तो वीर का प्रमाण है
कौरवों की भीड़ हो या पांडवों का नीड़ हो जो लड़ सका है वो ही तो महान है
जीत की हवस नहीं, किसी पे कोई वश नहीं, क्या ज़िन्दगी है ठोकरों पे मार दो
मौत अंत है नहीं, तो मौत से भी क्यों डरें, ये जा के आसमान में दहाड़ दो
आरम्भ है प्रचंड…

वो दया का भाव, या कि शौर्य का चुनाव, या कि हार का वो घाव तुम ये सोच लो
या कि पूरे भाल पे जला रहे विजय का लाल, लाल यह गुलाल तुम ये सोच लो
रंग केसरी हो या मृदंग केसरी हो या कि केसरी हो ताल तुम ये सोच लो
जिस कवि की कल्पना में, ज़िन्दगी हो प्रेम गीत, उस कवि को आज तुम नकार दो
भीगती मसों में आज, फूलती रगों में आज, आग की लपट का तुम बघार दो
आरम्भ है प्रचंड…

 


पियूष मिश्रा
गुलाल (2009)

 

माना के हम यार नहीं…

माना के हम यार नहीं,
लो तय है के प्यार नहीं (x2)

फिर भी नज़रे न, तुम मिलाना
दिल का ऐतबार नहीं
माना के हम, यार नहीं,

रास्ते में, जो मिलो तो
हाथ मिलाने, रुक जाना
हो…
साथ में कोई, हो तुम्हारे
दूर से ही तुम, मुस्काना

लेकिन मुस्कान, हो ऐसी
के जिसमें इकरार नहीं (x2)

नज़रों से ना करना, तुम बयां
वो जिस से इनकार नहीं

माना के हम, यार नहीं…

फूल जो बंद है, पन्नों में तो
उसको धूल बना देना
बात छिड़े जो मेरी कहीं, तुम
उसको भूल बता देना

लेकिन वो भूल, हो ऐसी
जिस से बेज़ार नहीं…

तू जो सोये तो मेरी तरह
इक पल को भी करार नहीं

माना के हम, यार नहीं…


कौसर मुनीर
Mar 28, 2017
“मेरी प्यारी बिंदु “