मुसाफिर?

मैं मुसाफिर बनूं, रास्ता हो तेरा
मंज़िलों से मेरी, वास्ता हो तेरा

रोशनी से तेरी, हो सवेरा मेरा
तू जहां भी रहे, हो बसेरा मेरा

यहां मेरे तेरे सिवा
है न दूजा कोई रे
अकेला मुझे छोड़ के
न जाना यूं निरमोही रे

हो कहानी मेरी, तर्जुमां हो तेरा
हो दुआएं तेरी, सर झुका हो मेरा

राज़ में भी तेरे, सच छुपा हो मेरा
मै कमाई जोडूं, क़र्ज़ अदा हो तेरा

यहां मेरे तेरे सिवा
है न दूजा कोई रे
अकेला मुझे छोड़ के
न जाना यूं निरमोही रे


अमिताभ भट्टाचार्य
Jul 10, 2017