खो गए हम कहां ? रंगों सा से ये जहां…

रूह से बहती हुई धुन ये इशारे दे
कुछ मेरे राज़ तेरे राज़ आवारा से

खो गए हम कहां
रंगों सा से ये जहां (x2)
टेढ़े-मेढ़े रास्ते हैं
जादुई इमारतें हैं
मैं भी हूं, तू भी है यहां
खोयी-सोई सड़कों पे
सितारों के कन्धों पे
हम नाचते-उड़ते हैं यहां

खो गए हम कहां
रंगों सा ये जहां (x2)

सो गयी हैं ये सांसें सभी
अधूरी सी है कहानी मेरी
फिसल जाएं भी तो डर न कोई
रुक जाने की ज़रुरत नहीं

कागज़ के पर्दे हैं
ताले हैं दरवाज़ों पे
पानी में डूबे हुए
ख्वाब अल्फ़ाज़ों के

खो गए हम कहां
रंगों सा ये जहां (x2)
टेढ़े-मेढ़े रास्ते हैं
जादुई इमारतें हैं
मैं भी हूं, तू भी है यहां
खोयी-सोई सड़कों पे
सितारों के कन्धों पे
हम नाचते उड़ते हैं यहां


प्रतीक कुहद, जसलीन रॉयल
“बार बार देखो”
August 3, 2016