राहें जुदा क्यों हो गयीं? | Chef

Oh ho ho hoooooooo….ohoooo

तेरे मेरे दरमियां हैं, बातें अनकही
तू वहां है, मै यहां क्यों
साथ हम नहीं? (x2)

फैसले जो किये, फासले ही मिले
राहें जुदा क्यों हो गयीं?
ना तू गलत, ना मै सही

ले जा मुझे साथ तेरे
मुझको न रहना साथ मेरे (x2)
ले जा मुझे
ले जा मुझे

थोड़ी सी दूरियां हैं
थोड़ी मजबूरियां हैं
लेकिन है जानता मेरा दिल
Hoooo….एक दिन तू आएगा जब
तू लौट आएगा तब
फिर मुस्कुरायेगा मेरा दिल

सोचता हूं यहीं, बैठे-बैठे यूंही
राहें जुदा क्यों हो गयीं?
ना तू गलत, ना मै सही

ले जा मुझे साथ तेरे
मुझको न रहना साथ मेरे (x2)
ले जा मुझे
ले जा मुझे

*that music*

यादों से लड़ रहां हूं
खुद से झगड़ रहा हूं
आंखों में नींद ही नहीं है
Hoooo….तुझसे जुदा हुए तो
लगता ऐसा है मुझको
दुनिया मेरी बिखर गयी है

दोनों का था सफर, मंज़िलों पे आकर
राहें जुदा क्यों हो गयीं?
ना तू गलत, ना मै सही

ले जा मुझे साथ तेरे
मुझको न रहना साथ मेरे (x2)
ले जा मुझे
ले जा मुझे

सुन मेरे खुदा
बस इतनी सी मेरी दुआ
लौटा दे हमसफ़र मेरा
जायेगा कुछ नहीं तेरा
तेरे ही दर पे हूं खड़ा
जाऊं तो जाऊं मै कहां?
तक़दीर को बदल मेरी
मुझपे होगा करम तेरा


रश्मि सिंह-विराग मिश्रा
Movie: शेफ़
Sep 2017

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मौला-आ-सल्ली | क़सीदत अल-बुर्र्दा

Maula wa sallim wa sallim da’iman abadan
Ala habi bika khairil khalqi kullihimi
Maula wa sallim wa sallim da’iman abadan
Ala habi bika khairil khalqi kullihimi

O Mawla (Protector, speaking to Allah)
Send prayers and peace always and forever
Upon Your beloved, the best out of all of Creation.

Muhammadun..
Muhammadun sayyidul kawnayni wa thaqalayn
Muhammadun sayyidul kawnayni wa thaqalayn
Wal fareeqayni min urbin’wa min’ajami
Wal fareeqayni min urbin’wa min’ajam

Muhammad is the Sayyid (leader) of the two worlds.
And the guide of both the Arabs and the non-Arabs.
Both creations and of both groups Arabs and Non-Arabs.

Maula wa sallim wa salim da’iman abadan
Ala habi bika khairil khalqi kullihimi

Huzita fil lahilam tuzham wa’lam tahimi
Huzita fil lahilam tuzham wa’lam tahimi
Hataa ghuwadad ummatal islami finjoomi

You (Muhammad) were guided by Allah and not defeated or weakened.
Until the Muslim Ummah remains among the stars.

Maula wa sallim wa sallim da’iman abadan
Ala habi bika khairil khalqi kullihimi
Maula wa sallim wa sallim da’iman abadan
Ala habi bika khairil khalqi kullihimi (x2)

Habiballah rasoolallah imam’al mursaleen (x4)

Beloved of Allah, Messenger of Allah
Leader of the Messengers.

Allahumma salli ala sayyidina
Muhammadin wa ala ali
Sayyidina muhammadin
Wabarik wa sallim

O Allah! Send your blessings and peace on our Master.
Muhammad and on Progeny of Muhammad.
Your favours and your blessings

 

Naat: Qasīdat al-Burda (Arabic for Poem of the Mantle). Qaseeda Burda Shareef is an ode of praise for the Islamic prophet Muhammad composed by the eminent Sufi, Imam al-Busiri of Egypt.

Poem: Maula Wa Sallim
Poet: Imam al-Busiri of Egypt (1213-1294)
Reciter: A.R Ameen s/o A.R. Rahman
Movie: OK Jaanu
Jan 4, 2017
Jama Masjid (built in 1424 during the reign of Ahmed Shah I)

a story

ओ बंदेया, ओ बंदेया (x3)
तेरी मंज़िलें, हुई गुमशुदा
फिर भी रास्ता है तेरा मेहरमा

ओ मीर-ए-कारवां
तेरी राहों पे रवां
के मेरे नसीबों में, हो कोई तो दुआ
ओ मीर-ए-कारवां
ले चल मुझे वहाँ
ये रात बने जहां सुबह
मीर-ए-कारवां
ओ मीर-ए-कारवां

ओ बस कर दिल अब,
बस कर भी (x2)
उस राह मुझे जाना ही नहीं
पल दो पल का साथ सफर, फिर होगी जुदा रहगुज़र

नदिया थाम के जो बहते रहें
मिलते है वो किनारे कहां …

ओ मीर-ए-कारवां
तेरी राहों पे रवां
के मेरे नसीबों में, हो कोई तो दुआ
ओ मीर-ए-कारवां
ले चल मुझे वहाँ
ये रात बने जहां सुबह
मीर-ए-कारवां
ओ मीर-ए-कारवां

बहार क्यू तेरे दर ना आती
है क्या भरम जो नज़र दिखती
अब और कितनी ये रात बाकी
है रात बाकी, ये रात बाकी

निग़ल ना जाए मुझे ये साये
गले में घुटती हैं सर्द आंहें
बता ओ बंदे क्यू मात खाये
क्यू मात खाये

हां, लागे ना दिल अब, लागे नहीं (x2)
मेरे पैरों तले निकली जो ज़मीं
इस बस्ती मे था मेरा घर
उसे किसकी लगी फिर नज़र

वो जो सपनों का था काफिला
ऐसा झुलसा की अब है धुआं

ओ मीर-ए-कारवां
तेरी राहों पे रवां
के मेरे नसीबों में, हो कोई तो दुआ
ओ मीर-ए-कारवां
ले चल मुझे वहाँ
ये रात बने जहां सुबह
मीर-ए-कारवां
ओ मीर-ए-कारवां

चल अकेला राही
चल चल अकेला राही
हाफ़िज़ तेरा इलाही
हाफ़िज़ तेरा इलाही


रोचक कोहली
(लखनऊ सेंट्रल)
Aug 2017

Vaporization

आसमां…कितना सारा था आसमां
जिसपे हमने था सब धरा,
पैर बादल पे था आया

रास्ता…हम थे पानी का रास्ता
ना किसी से भी वास्ता,
धूप थे, हम ही थे साया

धुंआ ऐसा उठा
तारों से टूट के गिरा
कुआं ऐसा बना
रस्सी से छूट के गिरा

रास्ता…पानी का था जो रास्ता
उड़ गया बन के भाप सा
मेरा धुंधला हुआ साया

आसमां…इतना सारा था आसमां
मिट गया कच्चे ख्वाब सा
रात ने मेरा दिल खाया

धुंआ ऐसा उठा
तारों से टूट के गिरा
कुआं ऐसा बना
रस्सी से छूट के गिरा

जल-जल के मुड़ना
और डर-डर के उड़ना
हुआ…क्या हुआ?

बच-बच के चलना
कहना कोई सच ना
हुआ…क्या हुआ?

हुआ…नाराज़ सा
शाखों से छूट के गिरा
जुआ…हर सांस का
आंखों में कील सा गड़ा

धुंआ ऐसा उठा
तारों से टूट के गिरा
कुआं ऐसा बना
रस्सी से छूट के गिरा


वरुण ग्रोवर (May 2016)
Film: रमन्ना-राघवन 2.0

so, what’s your goal in life?

तद दुम्म तद्दुम ता तद दुम्म ता
तद दुम्म तद्दुम ता तद दुम्म ता (x3)

सूरज जैसे चमकेंगे
देक्खे हैं साड्डी अंखियां ने
एह सपने अम्बरां दे
एह सपने अम्बरां दे

बूंद-बूंद जोड़ेंगे पल-पल
दूर-दूर बह जाएंगे
फिर नाल समन्दरां दे
फिर नाल समन्दरां दे

अस्सी एथे खड़े
है जाना परे
ना कम हमको तोल
अस्सी ज़िद ते अड़े
जनूनी बड़े
एह दिल के ने बोल

एक जिन्दड़ी मेरी
सौ ख़्वाहिशां
इक-इक मै पूरी करां (x2)
आ एक जिन्दड़ी मेरी
सौ ख़्वाहिशां
मुश्किल हमें रोकना

शहरों जैसे बन जाएंगे
लगदे ने जो छोटे-छोटे
एह रास्ते गलियां दे
एह रास्ते गलियां दे
फूलों की तरहा महकेंगे
हौले-हौले यारों
एक दिन मौसम गलियां दे
एह मौसम गलियां दे

अभी, ना जाने कोई,
पहचाने कोई,
है क्या अपना मोल
अस्सी ज़िद ते अड़े
जनूनी बड़े
एह दिल के ने बोल

आ एक जिन्दड़ी मेरी
सौ ख़्वाहिशां
इक-इक मै पूरी करां (x2)
एक जिन्दड़ी मेरी
सौ ख़्वाहिशां
मुश्किल हमें रोकना

रात है कजले वाली
दूर बड़ी दिवाली
दिवे ढूंढे अंखियां
दिल वाले घोसले में
पंछी बनाके यारों
हमने उम्मीदां रखियां

मैंने हारना नहीं है
चाहे कुछ भी कहे दुनिया

तद दुम्म तद्दुम ता तद दुम्म ता
तद दुम्म तद्दुम ता तद दुम्म ता (x2)
तद दुम्म तद्दुम
तद दुम्म तद्दुम
तद दुम्म तद्दुम
तद दुम्म तद्दुम


राकेश कुमार
Singer: तनिष्का संघवी
Film: हिंदी मीडियम (May 2017)
URL: https://www.youtube.com/watch?v=N0FLIsU8nxY

श्री राम अदालत में

जो बहा था खून,
उसके दूर तक छीटें गए
कल अदालत में पुनः,
श्री राम घसीटे गए

जज ने बोला हे प्रभु,
हमको क्षमा है चाहिए
आप नाम जज हुए हो,
कटघरे में आईये

अल्लाह नदारद है,
थे जबकि उनको भी summon गए
ऐसा सुन के कटघरे में,
राम जी फिर तन गए

राम बोले मैं हिन्दू मुस्लिम,
दोनों के ही साथ हूँ
मै ही अल्लाह, मै ही नानक,
मै ही अयोध्यानाथ हूँ
त्रेतायुग में जिस लिए,
मैंने लिया अवतार था
आज देखता हूँ तो लगता,
है की सब बेकार था

केवट और शबरी के बहाने,
भेद-भाव को तोड़ा था
तुमको समझाने को मैंने,
सीता तक को छोड़ा था
मेरे मंदिर के लिए जब,
तुम थे रथ पे चढ़ रहे
देश के एक कोने में थे,
कश्मीरी पंडित मर रहे

फिर मेरी ही सौगंध खा के,
काम ऐसा कर गए
मेरे लिए दंगे हुए,
मेरे ही बच्चे मर गए

खैर…
अब भी है समय,
तुम भूल अपनी पाट दो
जन्मभूमि पे घर बनाओ,
बेघरों में बांट दो

ऐसा करना हूँ मै कहता,
परम-पुन्य का कार्य है
न्याय, अहिंसा, परमार्थ, प्रेम
यही तो राम-राज है

तब बीच में बोला किसी ने,
जब वो था उकता गया
रामचंद्र का भेस बना के,
ये कौन मुसलमां आ गया
ऐसा कहना था के भैय्या,
ऐसा हल्ला मच गया
जो ऐन टाइम पे कट लिया
बस वो ही था जो बच गया

फिर राम-भक्तों के ही हांथों,
राम जी पीटे गए
जो बहा था खून,
उसके दूर तक छीटें गए
जो बहा था खून,
उसके दूर तक छीटें गए

गौरव त्रिपाठी
Jun 2nd, 2017
अनइरेज़ पोएट्री | द कुकू क्लब

सfar का

अब न मुझको याद बीता
मैं तो लम्हों में जीता
चला जा रहा हूँ
मैं कहाँ पे जा रहा हूं?
कहां हूं?

इस यकीं से मैं यहां हूं
की ज़माना ये भला है,
और जो राह में मिला है
थोड़ी दूर जो चला है,
वो भी आदमी भला था,
पता था…
ज़रा बस खफ़ा था

वो भटका सा राही, मेरे गांव का ही
वो रस्ता पुराना, जिसे याद आना
ज़रूरी था लेकिन, जो रोया मेरे बिन
वो एक मेरा घर था
पुराना सा डर था
मगर अब न मैं अपने घर का रहा,
सफर का ही था मैं, सफर का रहा

इधर का ही हूं, न उधर का रहा
सफर का ही था मैं, सफर का रहा

मैं रहा.
मैं रहा..
मैं रहा…

मील-पत्थरों से मेरी दोस्ती है
चाल मेरी क्या है राह जानती है
जाने रोज़ाना…
ज़माना वोही रोज़ाना

शहर-शहर फुर्सतों को बेचता हूं
खाली हाथ जाता, खाली लौट’ता हूं
ऐसे रोज़ाना
रोज़ाना खुद से बेगाना

जबसे गांव से मैं शहर हुआ
इतना कड़वा हो गया कि, ज़हर हुआ
मैं तो रोज़ाना
न चाहता था यह हो जाना…मैंने

ये उम्र, वक़्त, रास्ता गुज़रता रहा
सफर का ही था मैं, सफर का रहा

इधर का ही हूं, न उधर का रहा
सफर का ही था मैं, सफर का रहा


इरशाद कामिल
Jul 10, 2017