Young Guns of India…

सरफ़रोशी की तमन्ना अब हमारे दिल में है
देखना है ज़ोर कितना बाज़ु-ए-कातिल में है

करता नहीं क्यूँ दूसरा कुछ बातचीत,
देखता हूँ मैं जिसे वो चुप तेरी महफ़िल में है

ए शहीद-ए-मुल्क-ओ-मिल्लत मैं तेरे ऊपर निसार,
अब तेरी हिम्मत का चरचा गैर की महफ़िल में है

सरफ़रोशी की तमन्ना अब हमारे दिल में है
वक्त आने दे बता देंगे तुझे ऐ आसमान,

हम अभी से क्या बतायें क्या हमारे दिल में है
खैंच कर लायी है सब को कत्ल होने की उम्मीद,

आशिकों का आज जमघट कूच-ए-कातिल में है
सरफ़रोशी की तमन्ना अब हमारे दिल में है

है लिये हथियार दुशमन ताक में बैठा उधर,
और हम तैय्यार हैं सीना लिये अपना इधर

खून से खेलेंगे होली गर वतन मुश्किल में है,
सरफ़रोशी की तमन्ना अब हमारे दिल में है

हाथ जिन में हो जुनूँ कटते नही तलवार से,
सर जो उठ जाते हैं वो झुकते नहीं ललकार से

और भड़केगा जो शोला-सा हमारे दिल में है,
सरफ़रोशी की तमन्ना अब हमारे दिल में है

हम तो घर से निकले ही थे बाँधकर सर पे कफ़न,
जान हथेली पर लिये लो बढ चले हैं ये कदम

जिन्दगी तो अपनी मेहमान मौत की महफ़िल में है,
सरफ़रोशी की तमन्ना अब हमारे दिल में है

यूँ खड़ा मक़तल में क़ातिल कह रहा है बार-बार,
क्या तमन्ना-ए-शहादत भी किसी के दिल में है

दिल में तूफ़ानों की टोली और नसों में इन्कलाब,
होश दुश्मन के उड़ा देंगे हमें रोको ना आज

दूर रह पाये जो हमसे दम कहाँ मंज़िल में है,
वो जिस्म भी क्या जिस्म है जिसमें ना हो खून-ए-जुनून

तूफ़ानों से क्या लड़े जो कश्ती-ए-साहिल में है,
सरफ़रोशी की तमन्ना अब हमारे दिल में है


बिस्मिल अज़ीमाबादी (पटना)

। ऐ वतन, मेरे वतन ।

गोपनीयता की शपथ

“मैं, अमुक, ईश्वर की शपथ लेता हूं (/सत्यनिष्ठा से प्रतिज्ञान करता हूं) कि मैं विधि द्वारा स्थापित भारत के संविधान के प्रति सच्ची श्रद्धा और निष्ठा रखूंगा, मैं भारत की प्रभुता और अखंडता अक्षुण्ण रखूंगा, मैं… राज्य के मंत्री के रूप में अपने कर्तव्यों का श्रद्धापूर्वक और शुद्ध अंत:करण से निर्वहन करूंगा तथा मैं भय या पक्षपात, अनुराग या द्वेष के बिना, सभी प्रकार के लोगों के प्रति संविधान और विधि के अनुसार कार्य करूंगा।”
पद की शपथ

“मैं, अमुक, ईश्वर की शपथ लेता हूं / सत्यनिष्ठा से प्रतिज्ञान करता हूं कि जो विषय राज्य के मंत्री के रूप में मेरे विचार के लिए लाया जायेगा अथवा मुझे ज्ञात होगा उसे किसी व्यक्ति या व्यक्तियों को, तब के सिवाय जबकि ऐसे मंत्री के रूप में अपने कर्तव्यों के सम्यक निर्वहन के लिए ऐसा करना अपेक्षित हो, मैं प्रत्यक्ष अथवा अप्रत्यक्ष रूप से संसूचित या प्रकट नहीं करूंगा।”

#सरकारी_हिंदी

deep condolences

जब जब दर्द का बादल छाया,
जब ग़म का साया लहराया,
जब आँसू पलकों तक आया,
जब ये तनहा दिल घबराया,

हमने दिल को ये समझाया,
दिल आखिर तू क्यों रोता है?
दुनिया में यूँही होता है…

ये जो गहरे सन्नाटे हैं,
वक्त ने सब को ही बांटे हैं
थोडा ग़म है सबका किस्सा,
थोड़ी धूप है सब का हिस्सा

आँख तेरी बेकार ही नम है,
हर पल एक नया मौसम है
क्यूँ तू ऐसे पल खोता है?
दिल आखिर तू क्यूँ रोता है…

When-so-ever the clouds of pain and sadness loomed,
When-so-ever the shades of sorrow broomed
When-so-ever tears rose upto the lashes,
When-so-ever this forsaken heart got bashes,

I asked my heart,
oh dear, why you cry?
That is how it happens in this world.

See these deep silences…
the time has diffused ‘em for everyone.
everyone got some sorrowful episodes,
everyone got some sunny affairs.

your eyes, ‘tis stupid to wet ‘em.
each moment is a new season,
why you neglect such priceless moments?
oh heart, why you cry?

painkiller

पिघले नीलम सा बहता हुआ ये समां
नील-नीली सी खामोशियाँ
न कहीं है ज़मीं, न कहीं आसमां
सरसराती हुई टहनियाँ, पत्तियां
कह रहीं हैं की, बस एक तुम हो यहाँ

सिर्फ मैं हूँ…

मेरी साँसें हैं…

मेरी धड़कने,

ऐसी गहराइयाँ, ऐसी तन्हाइयां,

और मैं…

सिर्फ मैं…

अपने होने पे मुझको यकीन आ गया…

this Bollywood poem is about the revelation, disclosure, or acknowledgement of the self…at some point of time, life, suddenly offers us some unpleasant, unnecessary, and seemingly dreadful situations and moments, which drags us out of the comfort-zone we have accepted for ourselves.
…and breaks-apart the firmest fences we stretched inside us at some point of time…these fences are mere memories of temporary and perhaps forgettable pains.
life picks us to charge-on at our deepest and darkest vulnerabilities, and in reward something supernatural, metaphysical leaked inside us, that makes our existence enlightened. Hereafter, Our life becomes more meaningful, effective and pleasant for our selves and for the ones around us 🙂

it’s hell of a experience!!!

तो ज़िंदा हो तुम..

दिलो में तुम अपनी बेताबियां लेके चल रहे हो तो ज़िंदा हो तुम..
नज़र में ख़्वाबों की बिजलियां लेके चल रहे हो तो ज़िंदा हो तुम..
If you carrying your agitations in your heart, you are alive..
If you carrying vivid imaginations in your eyes, you are alive..

हवा के झोकों के जैसे आज़ाद रहना सीखो..
तुम एक दरिया के जैसे लहरों में बहना सीखो..
Learn to live free, as blows of a breeze..
Learn to wave through flows, as a river..

हर एक लम्हें से तुम मिलो खोले अपनी बाहें
हर एक पल एक नया समां देखे ये निगाहें..
Greet each moment, with your arms wide-open
Let each single moment, be a news to the eyes

जो अपनी आंखों में हैरानियां लेके चल रहे हो तो ज़िंदा हो तुम..
दिलो में तुम अपनी बेताबियां लेके चल रहे हो तो ज़िंदा हो तुम..
If you carrying surprises in your eyes, you are alive
If you carrying eagerness in your heart then you are alive

बेताबियां could also mean enthusiasm, fervor, dedication, restlessness, impatience, ambitions, longings, cravings, thirsts, hunger, yearning, fervency, ardour, zeal, greeds, rashness, hastiness, alacrity,
ख़्वाबों की बिजलियां could also mean fascinations, daydreams, fantasies, hopes, passions, curiosity, trance, visuals, musings, fallacies, misunderstandings, mirage, ideas, pride, vanity
आज़ाद could also mean in-dependent, un-attached, de-tached, un-chained, un-leashed, un-tied, un-fetter, un-shackled, un-constrained, self-sufficient, self-supporting, self-reliant, self-governing, autonomous, self-employed, dis-charged, set-free, liberation, release, devoid, resist-less,

All this is illusion…

ना कोई रात है
ना कोई दिन यहाँ
क्या यह अँधेरा है
के सिर्फ है धुंआ

आँखें धोखा खाती हैं,
ये किसको पता नहीं
जाने क्या है यहाँ और
जाने यहाँ क्या नहीं
है ये माया …

हीरे जो लगते हैं वोह,
मुमकिन हैं अंगारे हों
चिंगारी लगते हैं जो,
हो सकता है तारे हों

आँखें धोखा खाती हैं,
ये किसको पता नहीं
जाने क्या है यहाँ और
जाने यहाँ क्या नहीं
है ये माया …

चेहरे हैं सब एक से,
तू कैसे पहचानेगा?
दुश्मन है या दोस्त है,
तू कैसे यह जानेगा?

आँखें धोखा खाती हैं,
ये किसको पता नहीं
जाने क्या है यहाँ और
जाने यहाँ क्या नहीं
है ये माया …

Don 2 (2011)